“भगवान” रजनीश

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मेरे ही शहर में कॉलेज में एक अध्यापक थे। उन्होंने अपने नेम-प्लेट पर खुद ही ‘आचार्य’
लिखवा लिया था। मैं तभी समझ गया था कि इस फूहड़पन में महानता के लक्षण हैं।
आचार्य बंबईवासी हुए और वहाँ उन्होने अपने को ‘भगवान रजनीश’ बना डाला। आजकल
वह फूहड़ से शुरु करके मान्यता प्राप्त भगवान हैं।

— हरिशंकर परसाई, “विकलांग श्रद्धा का दौर”

 

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“It is not that we shoul…

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“It is not that we shouldn’t believe in fairies. It is just that we shouldn’t be satisfied with such mundane ones.

From the web comic Calamities of Nature, for March 12, 2012.